Hanuman Ashtak

< Back to Chalisa Sangrah Last updated: 28-Dec-2016

संकट मोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रवि भक्षि लियो तब । तीनहू लोक भयो अंधियारों ।।
ताहि सों त्रास भयो जग को । यह संकट काहु सों जात न टारो ।।
देवन आनि करी विनती तब। छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि। जात महाप्रभु पंथ निहारो ।।
चौंकि महा मुनि साप दियो तब । चाहिए कौन बिचार बिचारो ।।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु। सो तुम दास के शोक निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

अंगद के संग लेन गए सिय। खोज कपीस यह बैन उचारो ।।
जीवत ना बचिहों हम सो जु । बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब । लाए सिया सुधि प्रान उबारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

रावन त्रास दई सिय को सब । राक्षसि सों कही शोक निवारो ।।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु । जाए महा रजनीचर मरो ।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु। दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

बान लाग्यो उर लछिमन के तब । प्राण तजे सूत रावन मारो ।।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत । तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।।
आनि सजीवन हाथ दई तब । लछिमन के तुम प्रान उबारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

रावन जुद्ध अजान कियो तब । नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल । मोह भयो यह संकट भारो ।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु । बंधन काटि सुत्रास निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

बंधु समेत जबै अहिरावन । लै रघुनाथ पताल सिधारो ।।
देविहिं पूजि भलि विधि सों बलि । देउ सबै मिलि मन्त्र बिचारो ।।
जाये सहाए भयो तब ही । अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

काज किये बड़ देवन के तुम । बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।।
कौन सो संकट मोर गरीब को । जो तुमसों नहिं जात है टारो ।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु । जो कछु संकट होए हमारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि। संकटमोचन नाम तिहारो ।।

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
बज्र  देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ।।