Shri Durga Chalisa

< Back to Chalisa Sangrah Last updated: 21-Dec-2016

श्री दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी | नमो नमो अम्बे  दुःख हरनी ||
निरंकार है ज्योति तुम्हारी | तिहूँ लोक फैली उजियारी ||
शशि ललाट मुख महाविशाला | नेत्र लाल भृकुटि विकराला ||
रूप मातु को अधिक सुहावे | दरश करत जन अति सुख पावे ||
तुम संसार शक्ति लय कीना | पालन हेतु अन्न धन दीना ||
अन्नपूरना हुई जग पाला | तुम ही आदि सुन्दरी बाला ||
प्रलयकाल सब नाशन हारी | तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ||
शिवयोगी तुम्हरे गुण गावें | ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ||
रूप सरस्वती को तुम धारा | दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ||
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा  | प्रगट भई फाड़कर खंभा ||
रक्षा करि प्रहलाद बचायो | हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो  ||
लक्ष्मी रूप धरा जग माहीं | श्री नारायण अंग समाहीं ||
क्षीरसिन्धु में करत विलासा | दया सिन्धु दीजै मन आसा ||
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी | महिमा अमित न जात बखानी ||
मातंगी अरु धूमावति माता | भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ||
श्री भैरव तारा जग तारिणी | छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ||
केहरी वाहन सोह भवानी | लांगुर वीर चलत अगवानी ||
कर में खप्पर खड्ग विराजै | जाको देख काल डर भाजे ||
सोहे  अस्त्र और त्रिशूला | जाते उठत शत्रु हिय शूला ||
नगरकोट में तुम्हीं विराजत | तिहुँलोक में डंका बाजत ||
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे | रक्तबीज शंखन संहारे ||
महिषासुर नृप अति अभिमानी | जेहि अघ भार मही अकुलानी ||
रूप कराल कालि को धारा |  सेन सहित तुम तिहि संहारा ||
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब | भई सहाय मातु तुम तब तब ||
अमरपुरी अरु बासव लोका | तब महिमा सब रहे अशोका ||
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी | तुम्हें सदा पूजें नरनारी ||
प्रेम भक्ति से जो यश गावे | दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे ||
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई | जन्म मरण ताकौ छुटि जाई ||
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी | योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ||
शंकर आचारज तप कीनो || काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ||
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को | काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ||
शक्ति रूप का मरम न पायो | शक्ति गई तब मन पछितायो ||
शरणागत हुई कीर्ति बखानी | जय जय जय जगदम्ब भवानी ||
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा | दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ||
मोको मातु कष्ट अति घेरो | तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ||
आशा तृष्णा निपट सतावे | मोह मदादिक सब बिनशावें ||
शत्रु नाश कीजै महारानी | सुमिरौ इकचित तुम्हें भवानी ||
करो कृपा हे मात दयाला | ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला॥
जब लगि जियों दया फल पाऊँ | तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ||
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै | सब सुख भोग परमपद पावै ||
देवीदास शरण निज जानी | करहुँ कृपा जगदम्ब भवानी॥