Shri Bajrang Baan

< Back to Chalisa Sangrah Last updated: 02-Jan-2017

श्री बजरंग बाण

निष्चय प्रेम प्रतीति ते । विनय करैं सनमान  ॥
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥

जैसे कूदि सिन्धु महिपारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा ॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका ॥

जाय विभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥
बाग उजारि सिन्धु मँह बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा ॥

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा ॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर मँह भई ॥

अब विलम्ब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥
जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर होय दु:ख करहु निपाता ॥

जय गिरिधर जय जय सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर ॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहिं  मारू बज्र की कीले ॥

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो ॥
ॐ कार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीशा ॥
सत्य होहु हरि शपथ पायके। राम दूत धरु मारु जायके ॥

जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ॥

वन उपवन मग गिरि गृह मांही । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥

जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥

भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर ॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की । राखउ नाथ मरजाद राम की ॥

जनक सुता हरि दास कहावो । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥
जय जय जय धुनि होत आकाशा । सुमिरत होत दुसह दुख नाशा ॥

चरन शरण कर जोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥
उठ उठ चलु तोहि राम दुहाई । पांय परौं कर जोरि मनाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥
ॐ  हं हं हांक देत कपि चंचल । ॐ सं सं सहमि पराने खल दल॥

अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनंद हमारो ॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिर कौन उबारै ॥

पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करै प्राण की ॥
यह बजरंग बाण जो जापै । तेहिं ते  भूत प्रेत सब कांपै ॥

धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥

प्रेम प्रतीतिहिं  कपि भजै । सदा धरै उर ध्यान ॥
तेहि के कारज सकल शुभ । सिद्ध करैं हनुमान ॥